जानिए क्यों उठ रही है कर्नाटक राज्य मे अलग झंडे की माँग? 1960 में डिजाइन किया गया था यह ‘कन्नड़ ध्वज’

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बेंगलुरु/नई दिल्ली: हाल ही मे कर्नाटक के मुख्यमंत्री एस सिद्धारमैया द्वारा अलग पृथक कन्नड़ ध्वज की मांग को केंद्र सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है. साथी ही केंद्र ने यह भी कहा है कि संविधान के तहत राज्यों के अलग झंडे का किसी भी तरह का कोई प्रावधान नहीं है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संविधान के तहत ‘एक देश एक झंडा’ के सिद्धांत का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि तिरंगा ही पूरे देश का एकमात्र ध्वज है. गौरतलब है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने राज्य की खातिर एक अलग झंडे की कवायद शुरू की है.

कन्नड़ ध्वज-karnataka flag

Image Source: Hindustan Times

आख़िर क्यों उठी राज्य मे अलग झंडे की मांग?: चुनाव विशेषज्ञों की माने तो कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के अपने अलग क्षेत्रीय झंडे के प्रस्ताव को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. जिसको अमली जामा पहनाने के लिए कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने नौ सदस्यों वाली एक समिति का भी गठन किया है, जिसके तहत कर्नाटक राज्य के लिए एक अलग से झंडा डिजाइन करने और इसके लिए ज़रूरी कानूनी आधार मुहैया कराने के बाबत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. यहाँ आपको बता दें की कन्नड़ एवं संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता वाली एक समिति पिछले महीने ही गठित की गई थी. जिसमे प्रख्यात कन्नड़ लेखक एवं जाने माने पत्रकार पाटिल पुटप्पा और समाजसेवी भीमप्पा गुंडप्पा गडपा की ओर से दिए गए ज्ञापन के बाद इस समिति का गठन किया गया था.

 

पुटप्पा और गडपा ने अपने ज्ञापन में सरकार से अनुरोध किया था कि ‘कन्नड़ नाडु’ के लिए एक अलग कन्नड़ ध्वज डिजाइन किया जाए और इसे कानूनी आधार दिया जाए. इस समिति में कार्मिक एवं प्रशासनिक सेवा, गृह, कानून एवं संसदीय कार्य विभागों के सचिव भी शामिल किए गए हैं. इनके अलावा, कन्नड़ साहित्य परिषद, कन्नड़ विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और हम्पी स्थित कन्नड़ यूनिवर्सिटी के कुलपति भी समिति के सदस्य बनाए गए हैं. कन्नड़ एवं संस्कृति विभाग के निदेशक समिति के सदस्य सचिव होंगे.

 

यह झंडा 1960 में किया गया था डिजाइनः एक नवंबर जो कर्नाटक के स्थापना दिवस के रूप मे मनाया जाता है, हर साल इस दिन राज्य के कोने-कोने में अभी जो झंडा फहराया जाता रहा है, वह मोटे तौर पर लाल एवं पीले रंग का ‘कन्नड़ ध्वज’ है. गौरतलब हो की इस झंडे का डिजाइन वीरा सेनानी एम ए रामामूर्ति द्वारा 1960 के दशक में तैयार किया गया था.

 

अलग झंडे के मामले पर CM सिद्धारमैया ने किया अपना बचावः पत्रकारों द्वारा जब CM सिद्धारमैया से इस पर गठित समिति के बारे में पूछा तो सिद्धारमैया ने अपना बचाव करते हुए कहा कि क्या भारत के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान है जो किसी राज्य को अपना अलग झंडा रखने से रोके? अपने इस कदम का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘क्या संविधान में ऐसा कोई प्रावधान है ? क्या किसी ने संविधान में ऐसा कोई भी प्रावधान देखा है? क्या लोगों को ऐसे किसी प्रावधान के बारे में पता है? तो फिर यह मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है?’




बीजेपी सरकार से अलग है रुखः कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार की ओर से गठित समिति का कदम पिछली बीजेपी सरकार के रुख से काफ़ी अलग है. गौरतलब हो की साल 2012 में सदानंद गौड़ा की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार ने कर्नाटक उच्च न्यायालय को स्पष्ट करा था कि उसने दो रंग वाले कन्नड़ ध्वज को राज्य का आधिकारिक झंडा घोषित करने के वाले किसी भी सुझाव को स्वीकार नहीं किया है, क्योंकि अलग झंडे की माँग ‘देश की एकता एवं अखंडता के खिलाफ’ है.

 

News Source: India.com

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