तो यह हैं वो अहम वजहें जिनके चलते भारत के खिलाफ जंग छेड़ने से पहले कई बार सोचेगा चीन

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नई दिल्ली। अभी हाल ही मे सिक्किम से लगी सीमा पर जारी गतिरोध की वजह से भारत-चीन सेना एक बार फिर आमने सामने आ खड़ी हुई हैं जिसकी वजह से तनाव भी चरम पर है. इसके साथ ही चीन ने भारत को 1962 की जंग की याद दिलाई जिसके तुरंत बाद भारत ने भी चीन को आईना दिखाते हुए 2017 की स्थिति स्पष्ट कर दी. यही नही चीन ने एक बार फिर गीदड़भभकी भी दे डाली है. बहरहाल चीनी मीडिया आए दिन ही भारत के खिलाफ आग उगल रही है. पर यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है की क्या युद्ध जैसी स्थिति मे यह दोनों देश फिर एक बार आमने सामने आने को तयार हैं?




अगर हम युद्ध की बात करे तो चीन ने 1979 के वियतनाम युद्ध के बाद कोई भी बड़ी जंग नहीं लड़ी है. पर दूसरी ही तरफ अगर भारत की बात करे तो भारत 1962 के बाद से लगातार तीन बड़े युद्ध लड़कर जीत भी चुका है. यहाँ चीन भारतीय सशस्त्र सेनाओं की ताकत से अच्छी तरह से वाकिफ़ है और यह भी एक वजह है, फिलहाल हम बात करते हैं उन अहम बातो की जिनकी वजह से चीन भारत से किसी भी तरह का प्रत्यक्ष युद्ध करने से पहले कई बार सोचेगा

चीन-भारत-India-China War

 

भारत है चीन का सबसे बड़ा बाजारः

चीन यह बात अच्छे से समझता है की उसके सामानों के लिए भारत ही एकमात्र सबसे बड़ा बाजार है. अपनी अर्थव्यवस्था को भारतीय बाजार के दम पर ही मजबूत बनाता आ रहा है, यहाँ तक की चीन की कई नामी कंपनियां बड़ी मात्रा में भारत के बाज़ारो में अपना सामान बेचती हैं. इन मे प्रमुख कंपनियां ओप्पो, जियोमी, लेनोवो, वीवो, हायर, हवाई, टीसीएल शामिल हैं. हाल ही मे आए केंद्र सरकार के आंकड़ों पर एक नज़र डाले तो, मार्च 2017 तक चीन ने भारतीय बाजार में तकरीबन 4.91 अरब डॉलर का निवेश किया है. ऐसे में जाहिर सी बात है कि चीन भारत के साथ अपने रिश्ते बिगाड़ कर अपनी अर्थव्यवस्था से किसी भी तरह का रिस्क नही लेना चाहेगा|

 

भारत की सैन्य शक्तिः

अगर हम आज की भारतीय सैन्य शक्ति की बात करे तो 1962 के मुकाबले आज भारत काफ़ी मजबूत स्तिथि मे है. हालांकि चीनी वायुसेना के पास अभी भी भारत से ज्यादा फाइटर प्लेन हैं, लेकिन भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट सुखोई 30 एमआई का उसके पास फिलहाल कोई खास तोड़ नहीं है. यही नही भारतीय सुखोई 30 चीन के सुखोई 30 एमकेएम से काफी बेहतर और शक्तिशाली है.

 

भौगोलिक स्थिति भी है भारत के हित में:

अगर यहाँ हम भारत-चीन बॉर्डर की भौगोलिक स्थिति की बात करे तो वह काफ़ी हद तक भारत के पक्ष में है. युद्ध की स्तिथि मे चीनी विमानों को भारत तक पहुँच के लिए तिब्बत के ऊंचे पठार से उड़ान भरनी होगी. ऐसे में जाहिर है की न तो चीनी विमानों में ज्यादा भारी विस्फोटक लादे जा सकते हैं और न ही ज्यादा ईंधन भरा जा सकता हैं. फिलहाल चीनी वायुसेना भी विमानों में हवा में ही ईंधन भर लेने उतना सक्षम नहीं है. ऐसे मे जंग के हालात में चीन के लड़ाकू विमान जे-11 ए और जे-10 को चेंग डू सैन्य क्षेत्र से उड़ान भरनी पड़ेंगी जबकि भारत ने असम में सुखोई 30 लड़ाकू विमानो का बेस बनाया हुआ है. जंग की किसी भी स्थिति में वायुसेना के विमान यहां से तेजी से उड़ान भर सकेंगे.

 

ब्रह्मोस मिसाइल की नही है काट:

चीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती भारत की ब्रह्रोस मिसाइल है. आपको बता दें की ब्रह्मोस सुपर सोनिक मिसाइल को भारत ने रूस के साथ मिलकर बनाया है. लगभग 952 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से चलने वाली ब्रह्मोस चीन के रडारों तक को मात देकर दुश्मन पर सटीक निशाना लगाने में सक्षम है. यही नही, भारत के पास बीजिंग तक मारक क्षमता वाली लंबी रेंज की अग्नि सीरीज की मिसाइलें भी हैं.




भारत की थल सेना से मुकाबला बेहद मुश्किलः

अगर थल सेना पर नजर डालें तो दुनिया की सबसे बड़ी सेना चीन के पास है. सूत्रो के मुताबिक, चीन के पास करीब 22 लाख 85 हजार सशस्त्र सैनिक हैं, वहीं दूसरी तरफ 5 लाख 10 हजार के लगभग रिजर्व सैनिक भी हैं. यही नही, अर्धसैनिक बलों के रूप में भी करीब 6 लाख 60 हजार सैनिक हैं. वहीं दूसरी तरफ अगर बात करे भारत की तो भारत के पास 6,457 युद्धक टैंक, 1,710 स्वचालित वाहन, 4,788 बख्तरबंद लड़ाकू वाहन और लगभग 1,770 रॉकेट प्रोजेक्टर हैं. इसके साथ ही साथ भारतीय थल सेना के पास उच्च स्तरीय ट्रेनिंग और युद्ध जैसी परिस्थिति का सामना करने का बेहतर अनुभव है.

 

News Source: India.com

 

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